Abstract
राजनीतिक सहभागिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक आधारभूत एवं अनिवार्य घटक है, जो नागरिकों को शासन, नीति-निर्माण तथा सार्वजनिक निर्णय-प्रक्रियाओं में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करता है। किसी भी लोकतांत्रिक समाज की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके नागरिक राजनीतिक प्रक्रियाओं में कितनी जागरूकता, रुचि और सक्रियता के साथ भाग लेते हैं। राजनीतिक सहभागिता का स्वरूप केवल राजनीतिक संस्थाओं या संवैधानिक व्यवस्थाओं द्वारा निर्धारित नहीं होता, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक संरचनाएँ, पारिवारिक परिवेश, आर्थिक स्थिति तथा संचार माध्यम भी इसे गहराई से प्रभावित करते हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र राजनीतिक सहभागिता पर सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण तथा मीडिया के प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जाति, वर्ग, लिंग, शिक्षा, पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं सामाजिक मान्यताएँ नागरिकों की राजनीतिक चेतना, राजनीतिक व्यवहार तथा निर्णय क्षमता को प्रभावित करती हैं। इसके अतिरिक्त पारंपरिक मीडिया—जैसे समाचार पत्र, रेडियो एवं टेलीविजन—तथा डिजिटल मीडिया—विशेषतः सोशल मीडिया—राजनीतिक जानकारी के प्रसार, जनमत निर्माण और चुनावी व्यवहार को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सोशल मीडिया ने राजनीतिक संवाद को अधिक त्वरित, सहभागी और व्यापक बनाया है, जिससे नागरिक सहभागिता के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। तथापि इसके साथ दुष्प्रचार, फेक न्यूज़, सूचना अधिभार तथा वैचारिक ध्रुवीकरण जैसी गंभीर चुनौतियाँ भी उभरकर सामने आई हैं। अध्ययन निष्कर्षतः दर्शाता है कि सामाजिक-सांस्कृतिक कारक और मीडिया मिलकर राजनीतिक सहभागिता की प्रकृति, स्तर एवं गुणवत्ता को निर्धारित करते हैं तथा लोकतांत्रिक सुदृढ़ीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
Keywords
राजनीतिक सहभागितासामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोणमीडियाजनमतलोकतंत्रसोशल मीडिया
Cite this article
Ms. Preeti Gochar, Dr. Gaurav Kumar Sharma (2026). राजनीतिक सहभागिता पर सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण और मीडिया का प्रभाव. International Innovations & Scholarly Trends Journal, 2(6), 4261–4282.
Share
Copyright & License
© 2026 — Authors retain the copyright of this article.
This is an open access article distributed under the
Creative Commons Attribution License (CC BY 4.0)
,
which permits unrestricted use, distribution, and reproduction in any medium, provided the original work is properly cited.