राष्ट्रवाद, महिला सशक्तिकरण एवं स्वतंत्रता संग्राम: सरोजिनी नायडू के योगदान का ऐतिहासिक मूल्यांकन

Subject area: Arts and Humanities

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Abstract

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन अनेक ऐसे व्यक्तित्वों के त्याग, संघर्ष और नेतृत्व का परिणाम था, जिन्होंने राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखा। इन महान विभूतियों में सरोजिनी नायडू का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। वे केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, प्रेरक वक्ता, साहित्यकार तथा महिला अधिकारों की सशक्त समर्थक थीं। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन को जनसाधारण, विशेषकर महिलाओं तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके व्यक्तित्व में राजनीतिक सक्रियता, सामाजिक चेतना तथा साहित्यिक संवेदनशीलता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।प्रस्तुत अध्ययन में उनके राजनीतिक जीवन, स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी, महिला जागरण, सामाजिक सुधार तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में उनके नेतृत्व का समग्र मूल्यांकन किया गया है। साथ ही उनकी कविताओं एवं राष्ट्रवादी विचारों के परस्पर संबंध का भी विश्लेषण किया गया है।
यह अध्ययन ऐतिहासिक अनुसंधान पद्धति पर आधारित है, जिसमें पुस्तकों, शोध-पत्रों, आत्मकथात्मक स्रोतों, सरकारी अभिलेखों तथा अन्य प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेजों का उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सरोजिनी नायडू ने स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने तथा राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका जीवन भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा, सामाजिक समानता तथा महिला नेतृत्व का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करता है।

Keywords

सरोजिनी नायडूभारतीय राष्ट्रीय आंदोलनस्वतंत्रता संग्राममहिला नेतृत्वभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसराष्ट्रवादसामाजिक सुधारइतिहास।

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अजीत सिंह सोलंकी, डॉ कुलदीप सिंह (2026). राष्ट्रवाद, महिला सशक्तिकरण एवं स्वतंत्रता संग्राम: सरोजिनी नायडू के योगदान का ऐतिहासिक मूल्यांकन. International Innovations & Scholarly Trends Journal, 2(6), 4000–4006.

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